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जानिए कितना जरूरी है मैरिज सर्टिफिकेट, कैसे बनता है और क्या हैं फायदे

Marriage Certificate

Marriage Certificate

 

 

आज से वैवाहिक कार्यक्रम शुरू हो रहा है. शादी-विवाह एक समाजी प्रोग्राम है. इसमें दूल्हा-दुल्हन पक्ष के रिश्तेदार और सामाज के लोग एक जगह मौजूद होते हैं. इस दौरान मज़हबी रीति रिवाज के तहत शादी की रस्में अदा की जाती हैं. इसके बाद सामाजिक तौर पर से दोनों को एक साथ रहने का हक मिल जाता है. यह रिवायत सनातन से चले आ रहे हैं लेकिन अब क्योंकि जमाना मॉडर्न हो चला है, इसलिए शादी को और भी अटूट और कानूनी दायरे में भी रजिस्टर्ड किया जाने लगा है. साथ ही कई सरकारी स्कीमों का फायदा लेने के लिए इस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जरूरत महसूस होती है.

वहीं दूसरी तरफ किसी तरह की धोखाधड़ी और तलाक जैसे हालात में भी यह सर्टिफिकेट ज़रूरी लगता है. इस लिए शादी का रजिस्ट्रेशन कराना और सर्टिफिकेट हासिल करना दूल्हा दुल्हन के लिए फायदेमंद माना जाता है. मज़हबी रीती रिवाज और विशेष विवाह अधिनियम के तहत दोनों तरह से की गईं शादियों के लिए ज़िला विवाह पंजीयक से यह सर्टिफिकेट हासिल किया जाता है.

 

मैरिज सर्टिफिकेट के फायदे क्या-क्या हैं?
– भारतीय कानून के मुताबिक विवाहित होने का कानूनी सर्टिफिकेट माना जाता है.
– शादी के बाद अगर दुल्हन अपना सरनेम नहीं बदलना चाहती तो यह दस्तावेज संबंधित सभी कानूनी फायदे पहुंचाता है.
– ज्वॉइंट अकाउंट और जीवन बीमा करवाने के लिए यह सर्टिफिकेट ज़रूरी होता है
– शादी के बाद किसी भी नेशनल बैंक से लोन लेने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट लगता है.
– कई सरकारी स्कीमों का फायदा पत्नी लेना चाहती है तो यह सर्टिफिकेट मददगार साबित होता है.

क्या कहता है कानून?
भारत में शादी दो विवाह एक्ट में से किसी एक एक्ट के तहत रजिस्टर्ड किया जा सकता है- पहला हिन्दू विवाह अधिनियम (1955) दूसरा विशेष विवाह अधिनियम (1954). हिन्दू विवाह के पक्ष अविवाहित या तलाकशुदा होने चाहिए या अगर पहले शादी हो गई है तो उस शादी के वक्त पहली पत्नी या पति जिंदी नहीं होने चाहिए. विशेष विवाह अधिनियम में शादी अफसर के ज़रिए मुकम्मल करने तथा रजिस्टर्ड करने का प्रोवीज़न है. हिन्दू विवाह अधिनियम केवल हिन्दुओं के लिए लागू होता है, जबकि विशेष अधिनियम भारत के सभी नागरिकों के लिए लागू होता है.

Marriage Registration, Marriage Certificate

Court Marriage

कहां और किससे लें मैरिज सर्टिफिकेट
– हिंदू विवाह कानून के तहत उस रजिस्ट्रार के पास अर्ज़ी देने की जरूरत होती है, जिसके दायरे में शादी हुई हो या फिर दूल्हा-दुल्हन में से कोई मुतअल्लिका इलाके में कम से कम छह महीने से रह रहा हों.
– रजिस्ट्रेशन के लिए दोनों को अपने मां-बाप, वालिदैन या फिर शादी के गवाह रहे अन्य लोगों के साथ शादी के एक महीने के अंदर रजिस्ट्रार के सामने पेश होना होता है.
– इसमें पांच साल तक के वक्त की छूट रजिस्ट्रार दे सकता है लेकिन इससे बाद की छूट संबंधित जिला रजिस्ट्रार ही दे सकता है.
– विशेष विवाह कानून: इसके लिए शादी के ख्वाहिशमंद जोड़े को शादी अफसर के पास शादी से कम से कम 30 दिन पहले अर्ज़ी देनी होती है. इस अर्ज़ी की बुनियाद पर उस कार्यालय के नोटिस बोर्ड संबंधितों के शादी की नोटिस लगा दी जाती है.
– अगर लड़के या लड़की में से कोई किसी अलग इलाके का रहने वाला है तो वहां के संबंधित मैरिज अफसर के दफ्तर पर भी इसे चस्पा किया जाता है.
– अगर नोटिस चस्पा करने के एक माह के भीतर कोई ऐतराज़ नहीं आता है तो विवाह करा दी जाती है. अगर ऐतराज आता है तो अफसर जांच के बाद फैसला करेगा कि शादी करानी है या नहीं.

– शादी के बाद ही इसे रजिस्टर किया जाएगा. पहले से की गई शादी भी 30 दिन का नोटिस देने के बाद विशेष विवाह अधिनियम के तहत रजिस्टर कराई जा सकती है.
– कोविड-19 के चलते सर्टिफिकेट के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की सहूलत ऑनलाइन कर दी गई है. ऑनलाइन मैरिज सर्टिफिकेट फॉर्म के साथ कुछ जरूरी डॉक्युमेंट्स अपलोड करने पड़ते हैं.
– जिन गांवों में इसकी सहूलत नहीं है, वहां शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए नए जोड़े को ग्राम अधिकारी दफ्तर में राब्ता कर कुछ जरूरी दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं.

 

क्यों फायदे का सौदा है मैरिज सर्टिफिकेट हासिल करना?
सामाजिक बंधनों के बाद भी कई जोड़े शादी का प्रमाण पत्र लेते हैं. इसके कई फायदे भी हैं. जैसे अगर किसी जोड़े का एक साथी धोखा देकर भाग जाता है तो ऐसे में दूसरा साथी इस सर्टिफिकेट की मदद से पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा सकता है. अर्ज़ी के साथ लगने वाले दस्तावेजों की मदद से पुलिस मुजरिम का पता आसानी से लगा लेती है.

 

तलाक लेने का रास्ता हो जाता है आसान
मैरिज सर्टिफिकेट तलाक के लिए अपील करने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज माना जाता है. सिंगल मदर या तलाकशुदा के लिए नौकरी में रिज़र्वेशन का फायदा लेने के लिए तलाक का दस्तावेज दिखाना होता है. यहां तक कि गुजाराभत्ते के लिए भी आपको मैरिज सर्टिफिकेट दिखाना होगा.

मैरिज सर्टिफेकिट पाने के लिए कौन से डॉक्युमेंट्स लगते हैं?
– सर्टिफिकेट पाने के लिए दुल्हा-दुल्हन के ज़रिए दस्खत की हुई अर्जी पहला अमल मानी जाती है. इसमें शादी की तारीख, जगह, तारीखे पैदाइश, शादी के वक्त के हालात और शहरियत का जिक्र हो.
– दोनों का बर्थ सर्टिफिकेट.
– दूल्हा व दुल्हन के 4 पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
– दूल्हा-दुल्हन की रिहाइश और पहचान पत्र
– शादी कार्ड
– शादी के दो फोटो, जिनमें दुल्हा-दुल्हन का चेहरा साफ-साफ दिख रहा हो.
– अगर शादी किसी मज़हबी मकाम पर हुई हो तो वहां के पुरोहित या पंडित के ज़रिए जारी किया गया सर्टिफिकेट.

अगर किसी गैर मुल्की शहरी से शादी कर कर रहे हैं तो उस शख्स के देश की एम्बेसी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट ज़रूरी होता है.
– सरनेम बदलने के लिए 10 रुपये का नॉन-ज्यूडिशियल स्टैम्प पेपर लगाना होता है.
– 10 रुपये का नॉन-ज्यूडिशियल स्टैम्प पेपर पर पति-पत्नी के ज़रिए अलग-अलग एफिडेविट दिया जाता है.
–  सभी दस्तावेजों को किसी गैजेटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाना होता है.
– तीन गवाहों के अलावा दूल्हा-दुल्हन के मां-बाप या वालिदैन भी रजिस्ट्रार दफ्तर में मौजूद होने चाहिए.

 

 

Since various legal and technical issues are involved in the Marriage Registration/Court Marriage process, and due to lack of knowledge about the Government process, rules, and procedure for registering the marriage, also all the Marriage Registrar Offices in Delhi NCR are following different procedures, consequently, people often cheated or looted by the ‘Dallas’ or ‘Agents’ outside the Government office and paid a huge amount to get their work done from the government office. Further, the clerk at the Marriage Registrar’s offices also reject the appointment due to some silly mistakes in the application which they can rectify easily.

Therefore, we started this one-stop solution, under one roof, we make sure that your Marriage Registration application should be prepared as per the Government’s rules & procedure so that you will not face any issue on the day of the appointment. As a result on the day of the appointment at the Marriage Registration office, you just need to verify your original documents to the office bearers and sign the certificate.

 

Above all, now when all documents are ready send your address @ +91-8800456514. Our Clerk will come to you and will collect the Xerox copies of the self-attested documents and then we will after completing the documentation and verification fix an appointment.

 

Who can apply for Marriage Registration?

If you are already married you can apply for the marriage registration certificate under two acts one is the Hindu Marriage Act, 1955 and the other one is the Special Marriage Act, 1954. Where both the husband and wife belong to Hindus, Buddhists, Jains or Sikhs or where they have converted into any of these religions, the Hindu Marriage Act is applicable. In the other case where husband or wife or both the persons are not belonging to these communities Special Marriage Act, 1954 is applicable. Have a look at further stated information to know more.

Eligibility Conditions

  • Bride’s age is just more than 18 years and groom’s age is just more than 21 years

  • Either of Groom and Bride should be a citizen of India.

  • The jurisdiction of Marriage Registration will be based on either place of residence as per the aadhar of the husband or where the marriage ceremony was performed.

  • Two witnesses for Hindu Marriage registration and three witnesses for the Special Marriage Act registration should go to the Marriage Registrar’s office on the day of registration.

Govt. Fees for Marriage Registration Purpose

The fees of the government for the Marriage Registration purpose vary from State to state.

In Delhi the govt. fees start from 500 and maximum fees would be 2850. Similarly, in the state of Uttar Pradesh, the Govt fees start from 500 and increases at the rate of Rs. 50 per year calculated from the date of marriage.

 

Marriage Registration Complete Guide-Rules and Procedure

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